परिचय (समस्या की सच्चाई) आज के समय में सबसे बड़ी विडंबना यह है कि लोग जवानी को हल्के में लेते हैं । आराम, मौज-मस्ती और टालमटोल में दिन निकल जाते हैं। लेकिन वही लोग जब बुढ़ापे में पहुंचते हैं , तो उन्हें मजबूरी में दूसरों के लिए काम करना पड़ता है, कभी सम्मान के लिए, तो कभी सिर्फ पेट भरने के लिए। जवानी वो दौर है जहां शरीर में ताकत होती है, दिमाग में जोश होता है और मौके भी भरपूर होते हैं । लेकिन अगर इसी समय को बर्बाद कर दिया, तो आगे सिर्फ पछतावा ही बचता है। जवानी की कीमत समझो (समय वापस नहीं आता) जवानी एक बार जाती है, तो फिर कभी लौटकर नहीं आती। इस समय में आपकी एनर्जी सबसे ज्यादा होती है जोखिम लेने की क्षमता भी सबसे ज्यादा होती है सीखने और आगे बढ़ने का सही समय यही होता है 👉 अगर इस समय को सिर्फ मजे में गंवा दिया, तो भविष्य में आपको छोटे-छोटे कामों के लिए भी दूसरों पर निर्भर होना पड़ेगा । याद रखो: "जो इंसान जवानी में पसीना नहीं बहाता, वो बुढ़ापे में आंसू बहाता है।" आलस्य और टालमटोल की आदत (सबसे बड़ा दुश्मन) जवानी को बर्बाद करने का सबसे बड़ा कारण है — आलस्य और बहाने “कल से शुरू कर...
इस सच्ची कहानी से हमें ये सीख लेनी चाहिए... अगर इरादा पत्थर जैसा मजबूत हो, तो पहाड़ भी रास्ता दे देता है।एक पहाड़ को भी झुकना पड़ता है. गरीबी कभी सपनों को रोक नहीं सकती, अगर मन अमीर हो। ओर खुद पर भरोसा हो. किसी अपने के लिए की गई मेहनत में थकान महसूस ही नहीं होती। अगर दशरथ मांझी बीच में रुक के हार मान लेते तो लोग उनका मजाक बनाते. इसलिए दुनिया चाहे मज़ाक उड़ाए, अपने रास्ते से हटना मत। वरना खुद मजाक बन जाओगे, सब्र क्या होता है वो दशरथ मांझी जी ने सिखाया, 22 साल तक एक ही काम करते रहना, यही असली सब्र है। इंसान की पहचान उसके समाज के लिए किए गए काम से होती है। समाज ओर देश के लिए काम करना जीवन का पहला मकसद है. कभी-कभी दर्द इतना बड़ा होता है कि वो हमें बदल देता है।दर्द में बड़ी ताकत होती है. एक बड़े बदलाव के लिए हमेशा बड़ी ताकत नहीं, बस बड़ा दिल चाहिए। दृढ़ संकल्प चाहिए. किसके भरोसे मत बैठे रहो, मदद का इंतज़ार मत करो, खुद कदम बढ़ाओ। मेहनत का फल देर से आता है, लेकिन उसका स्वाद हमेशा मीठा होता है। साधन भले ही छोटे हों, पर सोच बड़ी रखो। अकेला इंसान चाहे गरीब हो छोटे गांव से हो फिर भी इत...