ये भगवान ने नहीं बनाया है!!
धन दौलत सब धूल है, वही श्रेष्ठ जो इंसान है
लाइफ हम जितनी समझते है उतनी आसान नहीं होती,
सबसे ज्यादा अगर इस दुनिया में कोई जिव संघर्ष करता है तो वो है इंसान,
वैसे तो हर किसीकी की लाइफ संघर्ष से भरी है, ज्यादा इंसान की लाइफ
मुश्किल है,
जो गरीब है उसका पूरा जीवन सुख पाने में निकल जाता है पर वो मेहनत से सुख नहीं पा
सकता है,पता हे क्यों क्युकी ये दुनिया मेहनत वालो की नहीं बेईमानी करने
वालो की है,
यहाँ दो प्रकार के इंसान रहते है, दोनों टेलेंटेड है, दोनों एक जैसे है उनको अलग करती है गरीबी और अमीरी ,,
गरीब का जीवन बचपन से ही संघर्ष उसके घर के हालत पे उसे झुकना पड़ता
है,मतलब कुछ खोना पड़ता है।
अब आप बोलेगे की उसके पास कुछ होता ही नहीं तो खोयेगा क्या ?
जी गरीब अपने जीवन में बचपन में अपने माँ बाप का प्यार खो देता है ,
हालत के आगे
अच्छी पढाई नहीं कर सकता है,बाजार के हर खिलोने से नहीं खेल सकता है,उसे उसके
हालत के सामने उसका स्वास्थ्य बिगड़ने पर भी झूझ जाना पड़ता है,
ये इंसानो का बनाया हुआ,तो इसको सच मानके हम इंसानीयत भूल जाये तो ये तो कोई बात नहीं बनती,कोई परंमपरा बरसो पहले बनी होती है तो उसके पीछे कोई कारन होता है,और कारन भी उस वक्त ख़तम हो जाता है पर परमपरा चलती रहती है,तो उसमे इंसान को एक बदलाव लाना चाहिए,हमसे दुनिया है,अगर हम ही हमको महत्व नहीं देंगे तो इंसानो में और जानवर में फरक नहीं रहेगा,क्युकी जानवरो में सब हे तो जानवर पर फिर भी वो एक दूसरे को दुसमन समझते है.
मानवता और परंपराओं का मधुर संगम: एक नवीन दृष्टिकोण
परंपराएं: मानव सभ्यता की नींव, ज्ञान का भंडार, और संस्कृति की पहचान। सदियों से चली आ रही ये रीति-रिवाज, हमारे जीवन को दिशा और अर्थ प्रदान करते हैं।
लेकिन क्या हर परंपरा सदाचार की गारंटी है?
यह सच है कि कुछ परंपराएं समय के साथ अप्रासंगिक हो जाती हैं, और उनमें निहित कुरीतियों को समाज में जड़ जमाने का मौका मिल जाता है।
क्या हम मानवता के नाम पर इन रूढ़ियों को अंधाधुंध स्वीकार करते रहेंगे?
नहीं!
आज के युग में, हमें अपनी विवेकशीलता का उपयोग करना चाहिए और परंपराओं का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए।
हमें उन रीति-रिवाजों को अपनाना चाहिए जो मानवता के मूल्यों को बढ़ावा देते हैं, और उन कुरीतियों को त्याग देना चाहिए जो समाज को पीछे खींचती हैं।
यह बदलाव आसान नहीं होगा, लेकिन यह आवश्यक है।
हमें अपनी सोच को खुला रखना होगा, और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठानी होगी।
हमें यह याद रखना होगा कि हम इंसान हैं, और जानवर नहीं।
हमारे पास तर्क करने, समझने और बदलने की क्षमता है।
आइए हम अपनी मानवता का उपयोग करके एक बेहतर समाज का निर्माण करें, जहां परंपराएं मानव मूल्यों के साथ मिलकर खिलें।
यह बदलाव हमसे ही शुरू होगा।
आइए हम आज से ही पहल करें!
यह एक नवीन दृष्टिकोण है, जो हमें मानवता और परंपराओं के बीच मधुर संगम स्थापित करने में मदद करेगा।
- दौलत चमकती है, पर आँचल गरीब का अच्छा लगता है
- अमीरी दीवारों की मजबूती है, गरीबी आसमान को छूने का हौसला,
- संसार में सुख का सार, संतोष और प्यार,
- धन दौलत सब धूल है, वही श्रेष्ठ जो इंसान है
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