"जैसा करोगे, वैसा ही लौटकर आएगा – बर्दाश्त कर सकोगे?"

कहना ये था,

आप जैसे हो वैसा अगर.. 

में बन जाऊ तो चलेगा ।। ✌


"आप जैसे हो, वैसा अगर मैं बन जाऊं तो चलेगा?" 


कभी सोचा है, अगर हम भी वैसे ही बोलने लगें, वैसे ही बर्ताव करने लगें, जैसे आप हमारे साथ करते हो, तो क्या सहन कर पाओगे?  


समाज में एक अजीब नियम बना हुआ है लोग अपने हिसाब से दूसरों के साथ पेश आते हैं, लेकिन जब वही बर्ताव उन्हें वापस मिलता है, तो तकलीफ होने लगती है। जो खुद दूसरों को इज्जत नहीं देता, उसे इज्जत की उम्मीद क्यों होती है? जो झूठ बोलता है, उसे सच्चाई की मांग करने का हक कैसे हो सकता है?  


जैसा करोगे, वैसा भरोगे! 

हर इंसान चाहता है कि लोग उससे अच्छा व्यवहार करें, लेकिन खुद को कभी आईने में नहीं देखता।  

- अगर आप दूसरों से कड़वे शब्द बोलते हो, और सामने वाला उसी अंदाज में जवाब दे, तो तकलीफ क्यों होती है?  

- अगर आप किसी को इग्नोर करते हो और वही आपको इग्नोर करे, तो तकलीफ क्यों?  

- अगर आप बेवजह किसी को नीचे गिराने की कोशिश करते हो, और वही इंसान आपको जवाब दे, तो गुस्सा क्यों?  


सवाल यही है, "अगर मैं भी वैसा ही करने लगूं, जैसा तुम करते हो, तो क्या तुम बर्दाश्त कर पाओगे?" 


दूसरों से वही उम्मीद रखो, जो खुद देने के लिए तैयार हो 

रिश्ते, दोस्ती, बिज़नेस हर जगह ये नियम लागू होता है।  

- अगर आप चाहते हो कि लोग आपकी इज्जत करें, तो पहले आप उन्हें इज्जत दो।  

- अगर चाहते हो कि लोग आपको धोखा न दें, तो खुद भी ईमानदार रहो।  

- अगर चाहते हो कि लोग आपको सुने, तो पहले खुद दूसरों की बात सुनना सीखो।  


याद रखना, यह दुनिया तुम्हारे ही कर्मों का आईना है। तुम जैसा व्यवहार करोगे, वैसा ही वापस मिलेगा। अगर बर्दाश्त नहीं कर सकते, तो सुधार करने का वक्त है।  


"पहले खुद को देखो, फिर दूसरों से उम्मीद रखो। क्योंकि अगर मैं भी तुम्हारे जैसा बन गया, तो तुम सहन नहीं कर पाओगे!"


#karma

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